Tuesday, May 8, 2007

कुत्‍ता मत कहो!!!


क्या आप इन्हे पह्चानते है?

3 comments:

akhilesh said...

ये जो तस्वीर है है एक कुत्ते कि और कहा जा रहा है कि कुत्ता न कहो.मेरे ख्याल मे शायद ये बेमानी भी नही है .जैसे हर आदमी मे एक कुत्ता होता है वैसे ही हर कुत्ते मे एक आदमी भी होता होगा.पहले के बारे मे तो मै कन्फ़र्म हू,दुसरे के बारे मे मै अधिकार से कह नही सकता.चलिये मान भी ले कि जनाब को कुत्ता न कहे तो क्या कहे,क्या आदमी मे कुत्ता कहे या कि कहे कुते मे आदमी.पर जैसे स्थाई भाव से हुजुर दिखाइ दे रहे है , लगता है कुत्ते मे आदमी ही है क्यो कि आदमी मे जो कुत्ता होता है भई वो ऐसे तो नहि हि निहार सकता. है न!मेरे अन्दर का कुत्ता तो ऐसा ही कह्ता है.आपकी आप जाने.

irfan said...

कुत्ते ने भी कुत्ते पाले देखो भाई
पैदल चलने वालों की अब शामत आई.
नागर्जुन

अजित said...

हुजूर को आदाब अर्ज़ है......
आप व्यस्तता के बीच हमारे धाम पधारे इसका शुक्रिया। हमारे लिखे को सराहा इसके लिए तहे दिल से आभारी है। समझदार लोग अगर
गंभीरता और ईमानदारी से किए जा रहे कार्य को सराहें तो उसका महत्व होता है। ये काम हमारा भी काफी समय ले रहा है मगर आप जैसे लोगों की बानी सुनकर मन पुलकित रहता है। चलो, इतना जीवन बेकार गया, कुछ तो अब ऐसी सद्बबुद्धि आई है कि अपने लोगों में मिल बांटें ..
आज आलोक पुराणिक चैट पर थे , कहने लगे कि अपने अवगुन तो बता दीजिए.....हमने कहा यही कि साथी ब्लागरों की पोस्ट पर टिप्पणी नहीं कर पाते...... यह मलाल हमें रहता है। मगर जितना भरसक होता है पढ़ते उन सभी को हैं जिन्हें अपने ब्लागरोल में जगह दी है। बाकी जो मजमून खुद ब खुद पढ़वा ले। जादू वही जो सिर चढ़ बोले...
साभार....