Monday, August 27, 2007

झमाझम बरसात में !!


मुम्बई में झमाझम बरसात का आलम है. ज़माने पहले ऐसी बरसात में भीगने में मज़ा आता था, पर अब बहुत कुछ बदल गया है अब बरसात को खिड़कियों से या अपनी बालकनी से देखते हैं और इस बरसात का मज़ा लेते रहते हैं. बचपन में ऐसे मौसम में खूब धींगा मस्ती होती थी जो अभी भी हमें याद है. हम अपने दोस्तों के साथ बरसात के इंतज़ार में दौड़्कर छत पर या कहीं सड़क पर शुरू हो जाते और खूब ज़ोर ज़ोर से सम्वेत स्वर में जो गाते थे. उसी में ऐसा लगता कि जीवन तर गया हो.....
दो पैसा के हल्दी!
पानी बरसे जल्दी!!

पर आज मैं अपने मित्र अजय कुमार की कविता आपके लिये लेकर आया हूं अजय अपने को कवि भी मानते नहीं हैं पर अलग अलग मौकों पर वो कुछ ना कुछ लिख ही देते हैं और हम सुनकर वाह वाह भी करते हैं. ये कविता आज ही ताज़ा ताज़ा लिखी गई है. मेरे पास उनकी कोई फोटो भी नही है जो इस मौके पर लगा देता, लीजिये पेश है अजय कुमार की कविता ......

घिर आई घनघोर घटायें !
बैठा हूं तन्हाई में!!
कैसे तेरी याद न आये!
सावन की पुरवाई में!!
तेरी पायल छनक रही है!
या सावन की रिमझिम है!!
सौ प्यालों का नशा छुपा है!
तेरी इक अंगड़ाई में !!

6 comments:

बोधिसत्व said...

अच्छी कविता है। अजय जी को मेरी शुभ कामनाएँ दें।सावन बीतते बीतते आप सावन को लेकर एक कविता छाप कर आपने अच्छा किया।

vimal verma said...

भाई बोधिजी मैने आपका संदेश अजय जी तक सम्प्रेषित कर दिया है.. सावन भादो आप कवियों के लिये है.. कविता कविता है जो कभी भी लिखी और पढ़ी जा सकती है.. ठीक है ना ?

sanjana said...

Whenever i was near i thought u never notice me...yes u never notice me..
when we were on corner of life...
u describe the world of me..
why you never notice me..
when i was so near to you..
when i was dear to you..
why you never notice me..
today the world comes to me...
talking about me to me...
when i ask how they know..
they say "one crazy poet described it"
Who say's he is not a poet.. its just the love for someone..which never come when she was never to me... never when she was dear to me...

इरफ़ान said...

भई वाह आपने तो बहुत ही बढ़िया भावों से दो चार कराया. और भी पढ़वाइयेगा.

sanjana said...

What we dont understand.....in the journey of 30 years.. when i came across around thousands of people..Suddenly it started hitting me..every second man/woman have same behaviour/habits..it means even emotion wise they are same... we dont speak our emotions. do we bother to know why..are we scared of discussing it with friends.. even with our loved ones why...

Vijay said...

AKAVITA BAHUT ACCHI LAGI. MERI
SUBHKAMNAIE. AGLI KAVITA KA INTJAR
HAI.