Friday, October 12, 2007

उस मोड़ का वो पीपल, करता है कितनी बातें ...... तलाश बैंड की कुछ रचनाएं !!!!


मै तलाश के बारे मे बताना चाहता हूँ , हममे से अमूमन सभी ने अपने यहाँ के बैंड को सुना ही है, चाहे वो इंडियन ओशन हों या यूफोरिया या बोम्बे वाइकिंग हो या आर्यन हो या अग्नि हो, ये सारे बैंड किसी ना किसी रूप में बड़े शहरों से ही जुड़े हुए है पर इनमे छोटे शहर से जुड़े किसी बैंड का नाम नही सुना गया पर आज लखनऊ शहर से जुड़े एक बैंड से मैं आपका परिचय कराना चाहता हूँ छोटे शहर मे रह रहे ऐसे ही मतवाले समूह से आपका परिचय कराता हूँ, इस बैंड का नाम है तलाश , चार पाँच लोगो की टोली है युवा है, इनके बैंड मे जो गीत गाये जाते हैं जो उसे इनके समूह के ही रितेश लिखते है , कैसा लिखते है ये आप सुन कर बताइयेगा, यहाँ मैं इनके गाने पर वाह वाह नही करूंगा अगर आपको वाह वाह जैसी बात लगे इनकी रचनाओं में, तो अपनी प्रतिक्रिया दीजियेगा, राहुल संजय, विभोर, अनीता, इनसे ही बना है तलाश, और सबसे बड़ी बात है की ये सभी लखनऊ के है, फिलहाल इन्होने हाल मे ही पुणे शहर को अपना आधार बनाया है और वही रहकर संगीत की सेवा में लगे हुए हैं, ये समूह अपना लिखा ही गाता है और संगीत रचना तो इनकी है ही, तो बिला वजह तारीफ न करके काम की बात करते है इनकी दो तीन रचनाएँ आपको सुनाता हूँ शायद आपको मज़ा आए , तो लीजिये सुनिये पहली रचना उस मोड़ का वो पीपल, करता है कितनी बातें........


अब सुनिये इस गीत को और अपने कॉलेज के दिनो की कैन्टीन तो याद आ ही जाएगी ..... चाय ज़रा सी ........




और ये रचना हर सुबह है परेशां .......



सुनने के बाद अपने अनुभव ज़रूर बांटिये कुछ सुझाव भी हो तो दीजियेगा आपके सुझाव तलाश तक ज़रूर पहुंच
जाएंगे!!!!

7 comments:

Srijan Shilpi said...

तलाश की ये रचनाएं मनमोहक लगीं। उनका उत्साह बना रहे, संगीत-साधना में।

Manish said...

अच्छा लगा कि छोटे शहरों के युवा भी संगीत को अपना कैरियर बनाने के लिए प्रयास रत हैं। गीतों के बोल अच्छे लिखे हैं और धुनें भी बेहतरीन हैं। पर आज के इस प्रतिस्पर्धा के युग में गायिकी में और मेहनत की जरूरत लगी। आशा है ये अपने अनवरत प्रयास से संगीत जगत में अपना मुकाम बना पाएंगे.

अनूप शुक्ल said...

बहुत अच्छा लगा ये रचनायें सुनकर। नौजवान संगीतकारॊं को हमारी शुभकामनायें। आपका शुक्रिया उनके गीत-संगीत हमको सुनवाने के लिये।

Sandhya said...

विमल जी बहुत अच्छा लगा तलाश बेंड से उपजे ये गीत सुनकर खासकर जब पता हो की अपने शहर से है .एक बात तो तये है की सुरों को कोई सरहद नहीं बाँध सकती .अच्छा काम कर रहे है ...पर शायद आज अच्छे काम को वाह वाही ज़रा मुश्किल से मिलती है और अपनी एक पहचान भी बड़ी मुश्किल से बनती है ....पर सच कहा है ..इरादे बुलंद हों तो मंज़िल ज़रूर मिलती है ...इनकी मेहनत रंग लाये यही इक्छा है .शुभकामनाये !!!!!

गिरीन्द्र नाथ झा said...

maza aa gya vimal jee..तलाश ko subhkamnayan

Jharkhand RTI Forum said...

Vimal Bhai, Sangeet ki duniya se judi smritiya taza kar di aapane. Koshish rahegi ke kuch wakt thumari ke liye bhi nikal saku
Vishnu Rajgadia

vimal verma said...

भाई आपलोगों ने सुना वाकई बड़ा अच्छा लगा,ये जो तलाश का अलबम था दरसल ये कफ़ी पुराना है, असल में ये अलबम भी" तलाश" के नाम से ही आया था साल २००४ में, अभी ये लोग अपने नये अलबम पर काम कर रहे है...मनीषजी आपकी बात से मैं सहमत हूं, कोरस की वजह से किसी खास आवाज़ पर तवज्जो ना होने की वजह से शायद प्रस्तुति थोड़ी कमज़ोर लग रही है, पर समय के साथ साथ अब स्थितियां बदल गई है, तलाश ग्रुप इन सारी स्थितियों को अच्छी तरह समझ कर अपना नया अलबम लेकर जल्दी ही आ रहा है, विष्णु भाई आप भी आये और आपकी टिप्पणी उत्साह बढाती है आपका शुक्रिया,अनूप भाई, सृजन शिल्पी जी, गिरीन्द्र जी और संध्या जी आपका भी शुक्रिया