Monday, December 10, 2007

बंद हैं तो और भी खोजेंगे हम,रास्ते हैं कम नहीं तादाद में !!


ये गीत आपको नज़र कर रहा हूं,इसे सम्भवत: लिखा था देवेन्द्र कुमार आर्य ने और इस गीत की धुन भी अच्छी बन पड़ी थी, संगीत और कोरस के साथ गाने का मज़ा ही कुछ और था,इसे लम्बे समय तक दस्ता इलाहाबाद के साथी गाते रहे थे,हमारे लोकप्रिय गीतों मे ये गीत भी शामिल था, पता नहीं और कहां लोग इसे गाते हैं, गीत करीब बीस साल पुराना है, अब ही पढ़ कर बताएं कि ये गीत कितना प्रासांगिक है,विनीता और अंकुर की वजह से ये गीत मुझे मिल पाया जिसकी तलाश मुझे काफ़ी दिनो से थी !!

इधर इरफ़ान ने भी इलाहाबाद को कुछ अलग ढंग से याद किया है उसे भी देख सकते हैं !! तो पेश है ये लोकप्रिय गीत !!


बंद है तो और भी खोजेंगे हम

रास्ते हैं कम नही तादाद में-२

आग हो दिल में अगर मिल जायेगा
हस्तरेखाओं में खोया रास्ता
बंद है तो और भी खोजेंगे हम
रास्ते हैं कम नही तादाद में-२

मुठ्ठियों की शक्ल में उठने लगे
हाथ जो उठते थे कल फरीयाद में
पहले तो चिनगारियां दिखती थी अब
हर तरफ़ है आग का इक सिलसिला


बंद है तो और भी खोजेंगे हम
रास्ते हैं कम नही तादाद में-२


टूटती टकराहटों के बीच से
इक अकेली गूंज है ये ज़िन्दगी
ज़िन्दगी है आग फूलों में छिपी
ज़िन्दगी है सांस मिट्टी में दबी

बन्द हैं तो और भी खोजेंगे हम
रास्ते हैं कम नहीं तादाद में

बनके खुशबू फूल की महकेंगे वे
जो किरण बन मिल गये हैं खाक में
बंद है तो और भी खोजेंगे हम
रास्ते हैं कम नही तादाद में

10 comments:

विकास कुमार said...

ऐसे काम नहीं चलेगा. गा के सुनाइए.

इरफ़ान said...

Wah kyaa yaad aayi.Mujhe bhee yaad aaee, ghalatiyan durust karein-
Kyaa hoga..Kyaa hogaa
Kahkar kaahe udaas too
Chhoti see naa_kaamee se naa
Tod re man kee aas too
Badee mushkilein aayeingee re
Jeewan ke is daur mein
Laakhon laakh jawaan lage hain
Naukariyon kee hod mein
Dheeraj se mehanat karta jaa
ek din aisaa aayegaa
Barson kee mehanat ke badle
Badee naukaree paayegaa..
Badee naukaree paayegaa..
Kyaa....Hoga...Kyaaa....hogaa

vimal verma said...

अरे ये तो राजा का बाजा है, आपकी गज़ब की याददाश्त है, मुझे तो एकदम याद नही है,गल्तियां कैसे दुरुस्त करूं ? शुक्रिया मित्र !!!

yunus said...

भई विमल जी कब सुधरेंगे आप । फिर से आपने गाने के बोल लिखकर टांग दिये । अरे गाकर सुनाईये गाकर । इत्‍ती अच्‍छी आवाज पाई है और आप हैं कि केवल बोल ठेल रहे हैं । जल्‍दी गाईये वरना हम अभी आपके घर आ रहे हैं सुनने के लिए । क्‍यों विकास सही कहा ना

चंद्रभूषण said...

विमल बाबू, बोल सुनके एक टिप्पणी हम भी ठेले थे, लेकिन लगता है कोई गलत बटन दब गया। पहली बार यह गाना मैंने इलाहाबाद युनिवर्सिटी यूनियन हाल में सुना था। दिमाग में तबतक गाने की जो कंसेप्ट थी, उससे यह इतना अलग था कि आप लोग गा रहे थे और श्रोताओं में खड़ा मैं मन ही मन जोर लगाए हुए था कि पांच-छह आवाजों की इतनी महीन बुनावट में कहीं कोई लोचा न रह जाए। एक यह और एक शशि प्रकाश का 'उड़ चलो असीम आसमान चीर के...'। फिर तो न जाने कितनी बार ये गाने आप लोगों से सुनने को मिले, लेकिन हर बार उतने ही नए लगते हुए, उतने ही दिल के करीब बजते हुए से...

Manish said...

यूनुस और विकास से सहमत हूँ। बहुत निराश किया आपने। ये क्या लिखा है कि धुन भी अच्छी बन पड़ी थी वो भी बिना सुनाए..अरे भाई पॉडकास्टिग के लिए audacity पर record करें। फाईल को mp3 में वहीं से convert करें और lifelogger में अपलोड करें।

vimal verma said...

कमाल है, इन गानों को बिना संगीत के गाना भी अन्याय है मित्रों,पढने में तो चल जाता है पर अकेली आवाज़ काफ़ी नही इन गीतों के लिये,हम कुछ प्रयास कर रहे हैं जिससे, आप इन सारे गानों को संगीत के साथ सुन पायेंगे,मैं आप सबकी मुराद पुरी करने में लग जाउं तो शर्तिया आप सभी थोडे से तो हैं, उन्हें, मै खोना नहीं चाहता, आपकी गुज़ारिश ठुमरी ने नोट कर लिया है !!

अजित वडनेरकर said...

बढ़िया गीत । अब गुनगुना भी दीजिए....कसम से

कला कम्यून said...

vimal sahi trip par ho, lage raho...........

रवीन्द्र प्रभात said...

भाई गीत मुझे अच्छा लगा , अगर धुन में सुना दिया गया होता , तो सोने पे सुहागा हो जाता !