कहने को तो बहुत सी बाते हैं कहने को,पर आज कुछ भी करने का मन नहीं है, जब कुछ भी करने का मन ना करे तो, संगीत आपको अंदर तक तर करने की कूवत तो रखती ही है,आज एक गीत सुनाने का मन कर रहा है जिसे लता जी ने अनुपमा फ़िल्म के लिये गाया था, मेरे बेहद पसंदीदा गीतों में भी ये गीत शामिल है...धीरे धीरे मचल ए दिले बेकरार कोई आता है......आज इसी गीत को ब्रायन सेलेस से सुनते हैं प्यानों पर...वाद्य यंत्रों में खास कर प्यानों पर इस गीत को सुनने का एक अलग ही मज़ा है....तो सुने और आनंद लें....
Thursday, 27 March, 2008
धीरे धीरे मचल ऐ दिले बेक़रार.....ब्रायन सेलेस
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9 comments:
धुन सुन के मनवा मगन हुआ जी ।
madhur...madhur
Brian Salas is a brilliant performer. Thanks for this. This is so beautiful.
आनन्द आ गया सर जी!!
जे अच्छी रही विमल भाई । हम भी कुछ फिल्मी धुनें छेड़ रहे हैं आजकल । ब्रायन सेलेस हमें बहुत पसंद हैं ।
इसकी कैसेट है और मजा आता है उसे सुनकर वैसे भी अभी लॉइफलॉगर का सर्वर डाउन है
कर्णप्रिय...बार बार सुनने पर भी जी न भरे.
बहुत बढिया, आनंद आ गया !
बहुत दिनों बाद ब्रायन सेलेस को सुनना बहुत ख़ुश कर गया, विमल भाई! धन्यवाद!!
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