Wednesday, March 2, 2011

गुलाम अली साहब की हीर की तर्ज़ में गाई एक ग़ज़ल !!

गु़लाम अली साहब की ग़ज़लें रेडियो पर जब भी सुनता तो सुनता ही रह जाता उनकी आवाज़ और उनकी अदायगी कमाल की लगतीं और एक समय 90 के दशक में उनको दिल्ली के सीरी फ़ोर्ट में उनको लाईव सुना तो वो आज तक मेरे ज़ेहन में तारी है,आईये आज गुलाम अली साहब की हीर की तर्ज़ में गज़ल सुनते हैं। "करते हैं मोहब्बत सब ही मगर.....

2 comments:

अमिताभ मीत said...

क्या बात है सर जी ..... मज़ा आ गया ....

अल्पना वर्मा said...

बहुत ही नायाब सा कुछ सुना आज ..आभार.