Sunday, March 9, 2008

खोया हुआ बच्‍चा, खांसता बूढ़ा और आंसू बहाती मीना कुमारी

इतनी सारी उलझनें कि किसी का घर खो जाता है, बुड्ढा खांसता है और खांसता चला जाता है... दोनों अपनी-अपनी जगह अकेले हैं... सिर पर मुसीबतों के भारी-भारी ऐसे तकलीफ़देह ढेले हैं... कौन करेगा इनकी मदद? कोई करेगा?



ठुमरी पर पॉडकास्‍ट: एक प्रयोग

14 comments:

इरफ़ान said...

बहुत ही सफल प्रयोग. बहुत ही कुशल खाँसी. बहुत ही रोता बच्चा. बहुत ही गाती मीना कुमारी...बहुत ही डराता पॉडकास्ट.

अब मुझे अपनी दुकान बंद करनी पडेगी.

yunus said...

वाह क्‍या बात है भई । छा गये आप सरकार

Tarun said...

बड़ा अनूठा प्रयोग किया है आपने, छा गये

अभय तिवारी said...

क्या रोया है.. क्या गाया है.. बहुत खूब दृश्य दिखलाया है..

काकेश said...

बढिया लगा यह प्रयोग.

Udan Tashtari said...

क्या सीन पैदा किया है..!! अद्भुत प्रयोग!

अजित वडनेरकर said...

बहुत खूब विमल भाई...लासानी अंदाज़
आज तक सुना गया सबसे सशक्त पॉडकास्ट...रोना-गाना-खांसना , गुज़रता रहा एक अफ़साना
आंखें पनिया गईं...पूरा नहीं सुन पाया, कहानी तो पता चल ही गई थी। बच्चे का माँ - बाप से यूं बिछुड़ना दुनिया का सबसे तकलीफदेह एहसास लगता है मुझे। कतरा जाता हूं उन लम्हात से ...सही कहते हैं इरफ़ान साहब ...बहुत ही डराता पॉडकास्ट...

विकास कुमार said...

वाह सर जी! मजा आ गया. :)

ajai said...

भाई विमलजी आपने कमाल कर दिया , मुझे कुछ और लग रहा है -
खोयी हुयी हॉकी की प्रतिष्ठा
खांसते हुए के.पी.यस.गिल
और रोती हुयी हाकी प्रेमी जनता

जोशिम said...

अद्भुत- हवामहल - मोबाईल हटा दें तो पुराना [दुस्वप्न?] - बहुत अनूठा - बधाई

रवीन्द्र प्रभात said...

निश्चित रूप से आपने बहुत ही सुंदर और अनूठा प्रयोग किया है , बधाईयाँ !

अनूप शुक्ल said...

अद्बुत प्रयोग!

AP said...

Behtreen...Vimal Bhai....Sahee hai..ek kalakar ke liye madhyam kopi seema nahin hai apney aap ko vyakt karney ke liye...

AP said...

क्या बात है विमल भाई.....आप का ब्लॉग पढ़ कर मज़ा आ गया. पुराने पुराने लोगों के याद ताज़ा हो गयी...इरफान.. प्रमोद संघ..दस्ता...Alahabad.बहुत से लोगों को टू मैं याद भी नहीं होऊंगा पर मेरे जेहन मैं सब के यादें ताज़ा हैं..अद्भुत है यह सब.....मित्र लोगों से उम्मीद यही है की हम से भी बतियाते रहें..और उस नशे को जिंदा रखें.