फुटपाथ पे रहने वाले बालक को देखिये, पैसे के अभाव में स्कूल छूट गया पर पैसा कमाने के वास्ते छै सात भाषाएं टूटी फूटी ही सही जानता है, दु:ख भी होता है और आशचर्य भी,.... इतनी सी उमर,लेकिन महानगर में पेट पालने के लिये दूसरे पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये ही सही...भाषाएं सीखना तो उसकी मजबूरी है.....पर यही खासियत भी है.......ज़्यादा बोलने से इस वीडियो का मज़ा जाता रहेगा, तो सुनिये इस चपल बालक की चटपटी बातें..
न शास्त्रीय टप्पा.. न बेमतलब का गोल-गप्पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्तो, है रंगमंच तैयार..
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Saturday, February 23, 2008
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आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को हिन्दी बारहखड़ी को समझना और याद रखना बहुत जरुरी है.|
पिछले दिनों नई उम्र के बच्चों के साथ Ambrosia theatre group की ऐक्टिंग की पाठशाला में ये समझ में आया कि आज की पीढ़ी के साथ भाषाई तौर प...
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जब से फेसबुक पर लोगों का आना जाना हुआ तब से मैं अपने ब्लॉग ठुमरी को समय ही नहीं दे पा रहा हूं परजबसे राजमोहन जी को सुना है तब...
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आज एक बहुत ही पुराना कोई गाना सुन रहा था वो गीत १९५० के आसपास का लिखा हुआ था ..जब भी...
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