photo by vimal
पहली बार होली के रंग से दूर हूँ , पर होली में सबके साथ बैठ कर कुछ नया सुनाने और गुनने का आनंद ही कुछ ही है ,अब जब होली आती है तो हम अपने अतीत में खो जाते हैं .....उसी में डूबते उतराते हैं, आज भी कुछ मन उसी तरह का हुआ जा रहा है , इसी मौके पर छाया गांगुली की आवाज़ में इस गीत को सुने और आनन्द लें |
न शास्त्रीय टप्पा.. न बेमतलब का गोल-गप्पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्तो, है रंगमंच तैयार..
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Monday, March 1, 2010
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आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को हिन्दी बारहखड़ी को समझना और याद रखना बहुत जरुरी है.|
पिछले दिनों नई उम्र के बच्चों के साथ Ambrosia theatre group की ऐक्टिंग की पाठशाला में ये समझ में आया कि आज की पीढ़ी के साथ भाषाई तौर प...
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जब से फेसबुक पर लोगों का आना जाना हुआ तब से मैं अपने ब्लॉग ठुमरी को समय ही नहीं दे पा रहा हूं परजबसे राजमोहन जी को सुना है तब...
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आज एक बहुत ही पुराना कोई गाना सुन रहा था वो गीत १९५० के आसपास का लिखा हुआ था ..जब भी...
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