आज अगर हमारे बीच पंचम दा होते तो सत्तर बरस के होते,कल ही तो उनके जन्म दिन पर हम उन्हें याद कर रहे थे,सचिन दा के बेटे तो थे पर उनकी पहचान पर कभी सचिन दा का साया नहीं पड़ा,यही तो उनकी खासियत थी, "सुबह" नाम का एक सीरियल आया करता था दूरदर्शन पर उसका शीर्षक गीत पंचम दा ने गाया था,नेट पर तलाशते तलाशते मिल गया,इस अलग सी आवाज़ को सुनिये और उन दिनों को याद कीजिये.
पंचम दा ने कुछ फ़िल्मों की थीम म्युज़िक भी बनाई थी, आज पंचम दा को याद करने लिये उनकी बनाई कुछ यादगार थीम म्युज़िक का आनन्द लेते है जैसे इसे सुनिये जो फ़िल्म शोले से है..
और नीचे वाले प्लेयर में अलग अलग फ़िल्मों का थीम म्युज़िक मिक्स है जिसे आप ज्यों ज्यों सुनियेगा त्यों त्यों फ़िल्म का नाम भी याद आ आता जायेगा..................... है ना यादगार?
होसला अफजाई के लिए आप का शुक्रिया... संगीत की समझ पैदा करने के लिए आपका ब्लॉग एक अद्भुत माध्यम है, जब भी अपने आप में आता हूँ या जिस दिन स्वयं हो जाता हूँ उस दिन ठुमरी पर जरूर आता हूँ ... एक बार फ़िर से शुक्रिया ... मोक्ष।
औघट घाट पर आपका स्वागत है साथ ही आभारी भी हूँ. अभी आप से बहुत छोटा हूँ और लिखना, पढ़ना सीख रहा हूँ इसलिए आपकी प्रतिक्रियाओं की हमेशा दरकार रहेगी। मोक्ष।
बचपन की सुहानी यादों की खुमारी अभी भी टूटी नही है..
जवानी की सतरंगी छाँह आज़मगढ़, इलाहाबाद,बलिया और दिल्ली मे..
फिलहाल १२ साल से मुम्बई मे..
मनोरंजन चैनल के साथ रोजी-रोटी का नाता......
टिनहा सा टीटी
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ठीक है, ठीक है, ले लेंगे लेकिन टेबल कहां है जो टेबल टेनिस खेलोगे। कई दिन से
जान खा रहे बेटे को समझाने की एक और कोशिश मैंने की। टेबल नहीं, बेंच पर
खेलेंगे, ...
Doodle 4 Google, गूगल पर चढ़ा हिंदुस्तानी रंग
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आज 14 नवंबर यानी बाल दिवस पर गूगल का होमपेज खोलने में बडा़ मज़ा आया। गूगल के
लोगो पर हिंदुस्तानी छाप जो थी। गर्व से सीना तो उस वक्त फूला जब पता चला कि ये
स...
'बुढ़िया कबड्डी' और बचपन के वे अनमोल दिन .....
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तो आज है बच्चों का दिन यानि बाल दिवस ! तो क्यूँ ना इस दिन बचपन की कुछ बातों
को साझा किया जाए एक बेहद दिलअज़ीज़ गीत के साथ। समय के साथ कितना बदल गया है
तब औ...
बाल दिवस
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जिनका बाल दिवस होता ,कैसे बच्चे होते हैं ?
खाने के ढाबे पर अब भी ,बरतन बच्चे धोते हैं ||
भूख ,गरीबी ,लाचारी में ,जीवन इनका बीत रहा |
जाने कितने नौनिहाल बस पे...
मेमेंटो बाँटो, फोटू खिंचवाओ
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परसों एक स्थानीय राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में सईद आलम लिखित, निर्देशित और टाम
आल्टर अभिनीत मौलाना आज़ाद पर मोनोलाग देखने गया था। टाम आल्टर पद्मश्री से
सम्मा...
नौ साल के नौकर से हैल्प हो जाती है
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भाई सा’ब यहाँ है तो अच्छा खाने को मिलता है. अच्छी जगह रह रहा है. खुश न होता
तो गाँव न भाग जाता. और हम कौन सा पहाड़ तुड़वाते है इससे? घर का छोटा-मोटा काम
करता...
ये हिमालयी कचरागाहें
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अभी हाल ही में मोटर साइकिल भ्रमण करते हुए यमुनोत्री जाना हुआ था । कई अच्छे और ख़राब अनुभव रहे . अच्छे -अच्छे लिख चुका बैठ के मयखाने में और ख़राब ले के आ पस...
स्त्री का ह्रदय
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युं ही किवदंती नही बनी होगीकि स्त्री का ह्रदयधरती की तरह होता हैपर्त-दर-पर्त खोदते जाने के बादक्या क्या निकलेगा? किस-किस पर जाने-अनजानेनेह की बारिश होगी?या ...
मियां करे दलाली, ऊपर से दलील!!
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[image: broker1] …मध्यस्थता की कीमत अगर कोई वसूलता है तब वह परोपकारी नहीं
बल्कि दलाल ही कहलाता है…
*पिछली कड़ी-**मियांगीरी मत करो मियां [संत-16]*
मध्यस्थ ...
मैं
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हवा,घटा और तूफान
मैं जंगल थी
और खोई हुई पगडंडी भी
गहन गाढ़ा कोई अहसास
मिट्टी भी
गले पत्तों में
पनपता कोई अंकुर भी
मैं वो लम्हा थी
जहाँ सच के दाय...
इलाहाबाद का रिक्शा बैंक
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उत्तर भारत से तरक्की के विचार, आइडियाज हमेशा देश की तरक्की के काम आते रहे
हैं। लेकिन, इसने एक बुरा काम ये किया कि उत्तर भारत के राज्य खासकर उत्तर
प्रदेश-ब...
सदाबहार गीत और मन के भाव
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कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें आप पहली बार सुन ले फ़िर बरसों तलक वे आपके वजूद
का एक हिस्सा बन जाते हैं ।
इन्हे तो मैं, सदाबहार गीत ही कहूंगी ।
~~~~ जरूरी नहीं ...
कितना आसान लगता था
-
Nazm,
कितना आसान लगता था
ख़्वाब में नए रंग भरना
आसमाँ मुट्ठी में करना
ख़ुश्बू से आँगन सजाना
बरसात में छत पर नहाना
कितना आसान लगता था
दौड़ कर तितली पकड...
भारत का पर्याय बन चुकी हैं ऐश्वर्या राय
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-हरि सिंह
ऐश्वर्या राय के बारे में कुछ भी नया लिख पाना मुश्किल है। जितने लिंक्स,उतनी
जानकारियां। लिहाजा हमने कुछ नया और खास करने के लिए उनके बिजनेस मैनेजर ...
मीडिया रेग्यूलेशन के सवाल
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टेलीविजन चैनलों में दिखाए जा रहे बेहूदा कार्यक्रमों की वजह से लोगों का
गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है. इसकी अनदेखी करना अब सरकार के लिए भी आसान नहीं है.
इसलिए प...
तनावग्रस्त पुरुषों की मदद कीजिए....
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दो दिन पहले , बहुत दिन के गैप के बाद लॉगिन हुई तो सन्देशों व चैटों की बाढ आ
गयी अच्छा लगा कि कम से अपनी अनुपस्थिति दर्ज हुई है :)
आज फिर लिखने से बच रही थी ...
९१ कोजी होम
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मिर्जा गालिब का पायलट एपिसोड बनाने के लिए , इस तरह का सेट बनाना था
जो ग़ालिब के घर से हो कर ,बल्लीमारा की गलिओं को पार करता हुआ .... ...पास की
मस्जिद तक
जाता...
सुधीश पचौरी न रवीश कुमार
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बहुत दिनों से जो बात कहना चाह रहा था उसे किसी युवा पत्रकार ने कह दिया।
साफ-साफ कह दिया कि हम किससे प्रेरणा लें। हिंदी में कोई नहीं है। न रवीश कुमार
से प्रे...
ओशियंस में गुलज़ार और विशाल की जुगलबन्दी
-
ओशियंस में गुलज़ार और विशाल भारद्वाज साथ थे. बात तो ’कमीने’ पर होनी थी लेकिन
शुरुआत में कुछ बातें संगीत को लेकर भी हुईं. बातों से सब समझ आता है इसलिए हर
बा...
तीन फ़िल्में..
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डॉक्यूमेंट्री थी, फ़िल्म देखे कुछ दिन हो गए लेकिन अवचेतन में अभी भी जैसे
कहीं अटकी हुई है. कुछ ख़ास फ़िल्मों के साथ क्या होता है ऐसा कि एक अच्छी
बित...
गांव की बात करे मीडिया : मार्क टली
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दक्षिण एशिया और खासकर भारतीय मामलों के प्रमुख पत्रकार व लेखक *मार्क टली* का
कहना है कि मीडियाकर्मियों को ग्रामीण क्षेत्रों की विशेष रूप से बात करनी
चाहिए।...
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी .... "तलत"
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बस तीन शेर "मीर" के ...... और एक पसंद का गीत "तलत" की आवाज़ में ......
*"हम ने भी नज़्र की है कि फिरिए चमन के गिर्द
यारब ! चमन के छूटने तक बाल-ओ-पर ...
क्या पता-कल हो न हो!!-एक लघु कथा
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मेरे घर के बाजू में मोड़ पर एक जंगल रहता है. जबसे इस घर में आया हूँ, तबसे उसे
देखता आ रहा हूँ. उसे न कहीं आना और न कहीं जाना.
तरह तरह के पेड़ हैं. मौसम के...
मैं चर्चाता हूँ...इसलिए मैं हूँ
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अगर इंसान पहचान के कई टुकड़ों में साथ साथ जीता है पिता, मित्र, धर्म, जाति...
तो भला ब्लॉगर की क्योंकर एकमुश्त पहचान होगी... वो भी अपने अलग अलग
चिट्ठों...
चिट्ठाचर्चा –यादों का एक सफ़र
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चिट्ठाचर्चा के चर्चाकार ऊपर से नीचे बायें से दायें पहली पंक्ति जीतेन्द्र
चौधरी, समीरलाल,आलोक कुमार ,सृजन शिल्पी,रविरतलामी, विपुल जैन, तुषार जोशी, अभय
तिव...
कारवां बढ़ता रहेगा
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-सुधीर सुमन शशिभूषण नहीं रहा, इसका मुझे यकीन नहीं हो रहा है। दिल्ली में मानो वह नए सिरे से मुझे मिला था, श्रीराम सेंटर के पास एक दिन। एनएसडी के पूर्व छात्र व...
राजनीतिक कविता: डेवोरा मेजर की एक कविता
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इस कविता का अनुवाद भी 'दहलीज़' के लिए ही किया गया था. अब शिरीष का अनुसरण
करते हुए- बिना 'दहलीज़' का लेबल लगाये- इसे प्रकाशित किया जा रहा है. ऐसा करते
हुए ...
उलझन..
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सीधे कहूं या बात घुमाकर कहूं? किसी जाननेवाले ने कहा सीधे कहने की बात मत ही
कहना क्योंकि तुम्हें जाननेवाले (जितना जान सकते हैं) समझ ही लेंगे मज़ाक कर
रहे ...
तो मैं भी
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कलम उठाने से कवितायें लिखी जा सकती
या फिर पैदा किये जा सकते विचार
या लहलहायी जा सकती एक क्रांति
या फिर सहेजा जा सकता कोई चिंतन
- तो उठा लेता मैं भी.
बस कह...
वर्ष-2009 : हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण श्रृंखला (क्रम-8)
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आईये आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं सामाजिक , सांस्कृतिक और एतिहासिक महत्व
से संवंधित विविध विषयों पर केंद्रित कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट से ।
" ब्लॉगिंग अभिव्यक...
वसुधैव कुटुम्बकम?
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दुनिया भर में फैले हुए प्रवासी भारतीय हिन्दुओं को यदि उन देशों के बहुसंख्यक
लोग गोमांस खाने पर मजबूर करने लगे तो उन्हे कैसा लगेगा। यदि वो अपनी मरजी से
ऐसा ...
My Weekly Twitter Updates for 2009-11-08
-
@dchucks Guess the answer is services like ping.fm, but I can't leave
Splitweet. Not sure why Linked-in didn't think about linking Twitter. in
reply to dch...
प्रभाष जोशी का जाना जिस अखबार के लिए खबर नहीं
-
7 नवम्बर के नवभारत टाइम्स ने प्रभाष जोशी के निधन पर एक लाइन की भी खबर छापना
जरुरी नहीं समझा। इसी प्रकाशन समूह का अखबार The Times Of India ने action on
pi...
उड़ गया....कागद कारे करने वाला हँस अकेला !
-
आज सुबह आकाशवाणी समाचार में वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार श्री प्रभाष जोशी के अवसान
का समाचार सुना. यूँ लगा जैसे मालवा का एक लोकगीत ख़ामोश हो गया. उनके लेखन में
मा...
Four Songs : my Choice 7
-
Here I come once again with a few songs of my choice. All the four artists
featured this time are first timers on this blog. Vasantrao Deshpande
(1920-1983...
नक्सली हिंसा और भीष्म पितामह का उपदेश!
-
आईबीएन7 पर संवाददाता एहेतशाम खान की दिल दहला देने वाली खबर चल रही थी। ये
कहानी भूख और बीमारी के कहर में लिपटे झारखंड के गढ़वा जिले के आदिवासियों की
थी। मिर...
अजय पोहनकर-बागेश्री-सखी मन लागे ना
-
राग बागेश्री कई दिनों से अलग अलग आवाज़ों में सुन रही हूँ ....बार -बार यही
ख़्याल आता है -
जो कोई हूक हो "जी" में
तो गूँज उठ्ठेंगे ..
ये बिरही सुर
कोशिशों से...
दिल नाउम्मीद तो नहीं , नाकाम ही तो है
-
आज रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर गीत चढ़ाने वाले शौकीनों के लिए ’खुले स्रोत ’ का
उपाय सोदाहरण बताया है । दो बार असफल होने के बावजूद उदास नहीं हुआ , फलस्वरूप
यह उ...
क्या इन्हें पितृत्व या मातृत्व का अधिकार होना चाहिए?
-
कोई भी समाचारपत्र उठाओ तो बच्चों के साथ होते अत्याचार भी पढ़ने को मिल जाते हैं। क्या बच्चों के साथ अत्याचार संसार का सबसे जघन्य अपराध नहीं है? क्या ऐसा अत्याच...
narimi narimi said the bird
-
Nadia Danon. Not long before she died a bird
on a branch woke her.
At four in the morning, before it was light, *narimi *
*narimi* said the bird.
What ...
गुलामगिरी: एक बेहद जरूरी किताब
-
♦ शेष नारायण सिंह
महात्मा गांधी की किताब हिंद स्वराज की शताब्दी के वर्ष में कई स्तरों पर उस
किताब की चर्चा हो रही है, जो जायज भी है। महात्मा जी की इसी किता...
आभार
-
अरसे बाद नीचे की कुछ पंक्तियां रविवार की सुबह अनायास मुंह से निकले, मैंने
उन्हें नोट कर लिया ... और इस तरह काफी दिनों के बाद कुछ लिखा / जीवन फिर
सार्थक लग...
स्वगत : २ : गीत चतुर्वेदी
-
*( हिंदी के युवा कवि-कथाकार गीत चतुर्वेदी ने कहानी पर अपनी बातें यहाँ एक
अलग लहजे में कही हैं. बिना लाग-लपेट के. एक विरल साफगोई और पैनेपन के साथ.
परम्परित...
परती परिकथा
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उनके बीच उल्लास खत्म हो गया है । बावज़ूद, वो अब भी किसी मोह में डूबे बात करते
हैं । चौंक चौंक कर हड़बड़ा कर किसी आवेग में एक दूसरे को तलाशते हैं । लेकिन बात
श...
जाओ लाओ पिया नदिया से सोन मछरी ..........
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आज अचानक यू -ट्यूब पे बच्चन जी की ये कविता मिल गई जिसे अमिताभ बच्चन ने ८० के
दशक में विदेश में हुए किसी फ़िल्म समारोह में गाया था । पहले ये एक कसेट में
थी ...
गुलाब के खिलने तक
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नाना मौस्कुरी का ज़िक्र यहाँ पहले भी हो चुका है और हमनें वादा भी किया था कि
अगली बार उनका गाया "White Roses from Athens" aka "*Weisse Rosen von Athens*"
सु...
‘ये लड़का पूछता है, अख्तरुल-ईमान तुम ही हो?
-
एक भूला बिसरा नाम- अख्तरुल-ईमान (1915-1996). ज़्यादातर लोग उन्हें एक फिल्मी
लेखक के तौर पर जानते हैं. थे भी. मगर फिल्मों से बहुत पहले ही वो एक नामवर
शायर...
हम नामवर न हुए तो का ! हमको ना बुलाओगे ?
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बड़ी भिन्नाट हो रही है, बड़े समय बाद अपने बिलागवतन में लोग इलाहाबाद के मीट का
चूरमा बना रहे हैं , अफ़सोस त ई है कि हमहुं को वहां ना बुलाके इसके संयोजक लोगो
बह...
नामवर के होने का अर्थ
-
*नामवर को जानो भाई*
जब 17 अक्टूबर की शाम में नामवर जी से फोन पर बात हुई थी तो यह तय हुआ था कि
मैं और वे 23 अक्टूबर को इलाहाबाद में गले लग कर भेटेंगे । भेट...
घट घट में पंछी बोलता-वीणा सहस्रबुधे-येसुदास
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भोर के स्वर हैं...
ईश है...
आशीष है ..
दो गीत अलग अलग आवाजों में ...
घट घट में पंछी बोलता
आप ही डंडी आप तराजू
आप ही बैठा तौलता ...
स्वर--वीणा सहस्रबुधे
...
रोज
-
रोज एक दुनिया लेती है जन्म
और रोज मर जाती है एक दुनिया।
रोज एक हौसला होता है बलंद,
और रोज ही पस्त होता है एक हौसला।
रोज उगती है एक उम्मीद,
और एक उम्मीद रोज ...
फ्राइबर्ग की कुछ छवियां
-
फ्राइबर्ग एक छोटा सा शहर है। यह शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन और शोध और वैकल्पिक
जीवन-समाज की खोज के लिए जाना जाता है। आबादी मुश्किल से ढाई लाख की है लेकिन
पार्...
गाँधी और गांधीवाद
-
नहीं ये बिल्कुल भी सही जगह नहीं है, जब मैं गाँधी जी के जन्म से लेकर, नाथूराम
गोडसे तक की मुलाक़ात का सचित्र वर्णन कराऊं। २ अक्टूबर ही नहीं १९४७ के बाद हर
प...
राग यमन- परिचय और दो बंदिश
-
राग यमन-
प्रथम पहर निशि गाइये ग नि को कर संवाद ।
जाति संपूर्ण तीवर मध्यम यमन आश्रय राग ॥
*राग का परिचय* -
1) इस राग को राग कल्याण के नाम से भी जाना जाता है...
-
*जंगल में मोर नाचा,हमने देखा *
लेकिन बन्दीपुर / नागरहोले के जंगल में काबिनी नदी के किनारे बने जंगल लौज तक
पहुँचने में रूह काँप गयी
बंगलोर से २३९ km पर बने...
'सेंसुअस साउथ'
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दक्षिण भारतीय सिनेमा को लेकर उत्तर भारतीयों के मन में बहुत से पुर्वग्रह हैं।
मसलन वे अविश्वसनीय होती हैं। उनमें काफी हिंसा होती है। तड़क-भड़क वाली
पोशाकें...
अलस्य सुबह... (डायरी..)
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18th August.09,
अलस्य सुबह दिल्ली में, होस्टल में हूँ। आज से workshop start है। my back is
gone completely… anyways we’ll see.
कल काफ्का नाटक पढ़ा (आसिफ...
तू नहीं तुम.....;तुम नहीं आप
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प्रेम को भाषा की ज़रूरत थी ही नहीं....ऐसा इतिहास में दर्ज था...अब भाषा
ज़रूरी हो गई थी । बहुत मेहनत से पुरुष नई भाषा ईजाद कर रहा था। उसके निपट
प्रेमी से भ...
बदलाव तो शतरंज का खेल है, शह और मात
-
सामाजिक बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन। सिस्टम बदलना होगा। बीस-पच्चीस साल पहले
नौजवानों में यह बातें खूब होती थीं। अब भी होती हैं, लेकिन कम होती हैं। कितनी
कम, न...
सही प्रश्न पूछना महत्वपूर्ण, सही उत्तर देना नहीं
-
TCS के एक मैनेजर कह रहे थे कि भारतीय मार्किटिंग में बहुत कमज़ोर हैं वर्ना कोई कारण नहीं भारत iPod जैसे उत्पाद खुद बना और दुनिया में बेच न सके। वे कह रहे थे (म...
आर्यभट मस्ट बी प्राउड
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काल का पहिया 1510 साल में पूरा घूम गया. बिहार में जहाँ तरेगना है, वहाँ तारों
को तरेगन कहते हैं. मिसाल- 'अइसा झापड़ मारेंगे कि दिन में तरेगन लउकने लगेगा'.
श...
मेरे किस्से मेरे यारों को सुनाता क्या है....
-
आइये आज हैं गु़लाम अली साहब को। अस्सी के दशक में जब गज़लें सुनने (और सुनाने
का भी) जूनून सा था तब जिन गायकों को सुन एक मदहोशी की सी स्थिति रहती थी उन
में ए...
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है
-
हबीब वली मोहम्मद (जन्म १९२१) विभाजन पूर्व के भारतीय उपमहाद्वीप के प्रमुख
लोकप्रिय ग़ज़ल गायकों में थे. एम बी ए की डिग्री लेने के बाद वली मोहम्मद १९४७
में ब...
पढ़ने का सुख
-
पढ़ी थी बरसों पहले ये किताब । नाम याद नहीं था बस इतना याद था कि कुछ मीठा सोता
बहा था मन में तब । कुछ भाव अटके थे , कोई देहात का गीत फँसा था , कुछ जगमागाते
ध...
ये उस्ताद अमीर ख़ाँ नहीं;गोस्वामी गोकुलोत्सवजी हैं
-
उनका स्वर,तान और बोल-बनाव सुनकर यही लगता है कि यह इन्दौर घराने के स्वर
सम्राट उस्ताद अमीर ख़ाँ साह्ब की आवाज़ है.लेकिन हुज़ूर ये हैं पद्मश्री गोस्वामी
गोकुलो...
उड़ते हुए रूई के फाहे
-
हमारा घर बहुत छोटा था। सदस्य ज्यादा थे। घर के लोगों के हाथ-पैरों पर खरोंचों
के निशान थे। हम जब भी घर में आते-जाते तो हमें घर में रखी टूटी आलमारी,
कुर्सी, ...
"Nepal" a clash of titans
-
Whenever I read something about Nepal it always appears to me a "clash of
titans". Two heavy weights, INDIA and CHINA fighting behind the smoke screen
t...
लाल गोपाल
-
पंडित जसराज का गया गया यह गीत तो होली का है लेकिन सुंदर गीत कभी भी सुने
जा सकते है। गजब का जादू है इनके आवाज़ में। मेरे लिए तो यह गीत बहुत सुकून
देने वाला ह...
एलिस इन वंडरलैंड
-
अच्छी लड़की ।सीधा कॉलेज ।कॉलेज से सीधा घर ।आँखे हमेशा नीची । लम्बी बाह के
कुर्ते और करीने से ढँकता दुपट्टा ।पढने मे होशियार ।शाम को कभी घर से बाहर नही
निकल...
भारतीय कला का आत्मसम्मान विहीन पिछला दशक
-
आजादी के बाद भारतीय साहित्य, संगीत, नाटक और चित्रकला आदि को संरक्षित और
प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय और राज्य कला अकादमियों की स्थापना
की गयी...
2008 RMIM पुरस्कार परिणाम
-
साल 2008 की हिंदी फ़िल्मों के गानों, एल्बमों, और कलाकारों में से श्रेष्ठ को
चुनने की एक लंबी प्रक्रिया के बाद इस साल की पुरस्कार सूची हाज़िर है.
परिणाम हिं...
गूगल का नया ब्राउजर
-
गूगल आज एक नया ब्राउजर लॉन्च करने वाला है। गूगल के ब्लॉग पर इसकी ख़बर यहाँ
पढिये।
गूगल के द्बारा लाया जाने वाला हर प्रोडक्ट कुछ ना कुछ बदलाव लाता ही है। अब...
मोहब्बत के रंग: रसीदी टिकट से एक और हिस्सा
-
अमृता प्रीतम का प्यार कितनी तहों से झाँकता है और कितनी परतें उसे ढँकने आती
हैं...ये बात रसीदी टिकट पढते हुए बख़ूबी समझी जा सकती है...एक पिछडे और
वर्जनाओं ...
Shaheed Bhagat Singh
-
WE ARE IN THE 100TH BIRTH ANNIVERSARY YEAR OF BHAGAT SINGH.HE IS INDIA’S
BEST KNOWN REVOLUTIONARY,MARTYR,FOUNDER OF INDIA ‘S SOCIALISTS,COMMITTED
MARXIST...
जाने पहचाने लोग
-
एक एक आदमी की तलाशी ली जा रही थी।
ठंडे लोहे की नाल फौजियों के दाहिने कंधे के पीछे किसी भाले की तरह निकली
दिखतीं थीं। उन सभी ने लोहे के हेलमेट पहन रखे थे। ...
दिस इज़ इंग्लैंड (2006)
-
This Is England (UK)
सन 83 में आधारित यह ब्रितानी फ़िल्म उस दौर के इंग्लैंड के बेरोजगार युवाओं
(स्किनहेड्स) के उद्देश्यहीन और अक्सर हिंसक आवारापन, फ़ॉकलैंड...
5 comments:
सुरीली यादों का सफर ....
पंचम को याद करने और हमें याद करने के लिये याद दिलाने के लिये धन्यवाद
सुबह फिल्म का वो टाइतल गीत ऍ जमाने तेरे ए ए ए सामने आ गए मेरे पास आज भी कैसेट में रिकार्ड है। उसकी याद दिलाने का शुक्रिया।
होसला अफजाई के लिए आप का शुक्रिया... संगीत की समझ पैदा करने के लिए आपका ब्लॉग एक अद्भुत माध्यम है, जब भी अपने आप में आता हूँ या जिस दिन स्वयं हो जाता हूँ उस दिन ठुमरी पर जरूर आता हूँ ... एक बार फ़िर से शुक्रिया ... मोक्ष।
औघट घाट पर आपका स्वागत है साथ ही आभारी भी हूँ. अभी आप से बहुत छोटा हूँ और लिखना, पढ़ना सीख रहा हूँ इसलिए आपकी प्रतिक्रियाओं की हमेशा दरकार रहेगी। मोक्ष।
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