भारतीय कार्यक्रम आते ही हम रेडियो बन्द कर दिया करते थे,अक्सर किसी ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम में ऐसे संगीत के बारे में मिमिक्री आर्टिस्ट मिमिक्री करते हुए मज़ाक में यही कहता कि ऐसा गाने के लिये जाड़े की सुबह लोटे -लोटे पानी से नहाने पर जो मुंह से ध्वनि निकलती है वही असली शास्त्रीय संगीत है, बचपन से बहुत से शास्त्रीय संगीत से जुड़े संगीतकारों के नाम सुनते थे उन्हीं में एक बड़े फ़नकार का नाम सुना नाम था बड़े गुलाम अली ख़ान आज उन्हीं से मुत्तालिक़ एक वीडियो यू-ट्यूब पर मिला तो उसे आप भी देखें और धन्य हों। ये
वीडियो करीब १५ मिनट का है |
7 comments:
जनाब वर्मा जी,
जो आपने बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ साहब को सुनवाया उस अहसान का बदला किस तरह चुकाया जाएगा जी हम तो अब इस ऊहापोह में हैं। हमें मुआफ़ करें जो बहुत बहुत और बहुत देर से आपके ब्लॉग पर आए। रुलाई आ गई जी, नीरज जी का कारवाँ वगैरह सुनकर। अरे ये सब कहाँ हैं ? मालिक इन सब को हमारे हिंद पर लौटा लाए। आमीन।
बहुत दिनो से इस वीडियो की तलाश थी, आज आपने ये तमन्ना पूरी करदी. पूरा प्रोग्राम कहाँ मिलेगा ?
बहुत शुक्रिया जनाब.
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
सुनकर संगीत के कुछ नवीन सत्य का (मेरे लिये) का उद्घाटन हुआ. खासकर घराने का कांसेप्ट.
अभी कबाड़खाना पर आनन्द लेकर चले आ रहे हैं. आभार!!
आभार !
कल ही DD पर प्रोग. था जिसमे आल इंडिया रेडियो ने खाँ साहब की पुरानी रिकार्डिंग्स का अल्बम रिलीज़ किया है...
आईये... दो कदम हमारे साथ भी चलिए. आपको भी अच्छा लगेगा. तो चलिए न....
great job.... sangeet premion ke liye to apka blog kisi khazaane se kam nh hai... thanks
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