जीवन का उद्देश्य क्या होना चाहिये ये तो सवाल ही कुछ उलझा हुआ है, इतना जीवन जी लेने के बाद भी यही समझ में आता है कि वास्तव मे जैसा जीवन हम जीना चाहते है, वो जीवन हमको मिल पाता है या नही पर पता नही क्यों जर्मनी के नाटककार बर्तोल्त ब्रेख्त की ये कविता इस मौके पर याद आती है॥जो पुराने दिनॊं की याद दिलाता है, वैसे यह कविता मुझे ठीक तरह से याद नही है किसी को पता हो तो बाद मे फिर उसे दुरुस्त कर लिया जायेगा।
तुम्हारा उद्देश्य ये न हो
कि तुम एक
बेहतर इंसान बनो
बल्कि
ये हो कि तुम
एक
बेहतर समाज से
विदा लो !!
इतनी बडी़ दुनिया को बेहतर बनाना तो अकल्पनीय है बहुतों का नाम दुनियां को बेहतर बनाने में आता है,पर मैं अपना नाम बेहतर इंसानो मे देखना चाहता हूं. हमेशा मेरी यही कोशिश रहती है.कामयाब होना ना होना अलग बात है !!
न शास्त्रीय टप्पा.. न बेमतलब का गोल-गप्पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्तो, है रंगमंच तैयार..
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