Sunday, 28 June, 2009

पंचम दा को याद करते हुए......

आज अगर हमारे बीच पंचम दा होते तो सत्तर बरस के होते,कल ही तो उनके जन्म दिन पर हम उन्हें याद कर रहे थे,सचिन दा के बेटे तो थे पर उनकी पहचान पर कभी सचिन दा का साया नहीं पड़ा,यही तो उनकी खासियत थी, "सुबह" नाम का एक सीरियल आया करता था दूरदर्शन पर उसका शीर्षक गीत पंचम दा ने गाया था,नेट पर तलाशते तलाशते मिल गया,इस अलग सी आवाज़ को सुनिये और उन दिनों को याद कीजिये.

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पंचम दा ने कुछ फ़िल्मों की थीम म्युज़िक भी बनाई थी, आज पंचम दा को याद करने लिये उनकी बनाई कुछ यादगार थीम म्युज़िक का आनन्द लेते है जैसे इसे सुनिये जो फ़िल्म शोले से है..



और नीचे वाले प्लेयर में अलग अलग फ़िल्मों का थीम म्युज़िक मिक्स है जिसे आप ज्यों ज्यों सुनियेगा त्यों त्यों फ़िल्म का नाम भी याद आ आता जायेगा..................... है ना यादगार?

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Sunday, 21 June, 2009

भोजपुरी फ़िल्म "लागी नाहीं छूटे रामा " के कुछ गाने....

इरफ़ान जी ने टूटी बिखरी में भोजपुरी के बदनाम गानों की एक लम्बी फ़ेहरिस्त लगाकर वाकई बहुत अच्छा काम किया,दर असल अगर देखा जाय तो भोजपुरी के नाम पर इसके सिवा कोई बहुत अच्छा का काम हुआ भी नहीं है और आज भोजपुरी फ़िल्में धड़ाधड़ बन तो रही हैं पर माल काटने के चक्कर में कोई मेहनत करके अच्छी फ़िल्म और अच्छे गीत जनता को दे ऐसी यहां किसी की चिन्ता भी नहीं है.

खैर टूटी हुई बिखरी हुई पर उन बदनाम भोजपुरी गीतों को सुनने के बाद लगा कि एक काम और भी किया जा सकता है कि कुछ बेहतर रचनाएं भी अगर कहीं दिखे उन्हें कम से कम एक जगह इकट्ठा तो किया ही जा सकता है, लोकगीत तो भोजपुरी में भरा पड़ा है पर ऑडियो में हमारे पास फ़िल्मी भोजपुरी गीतों के अलावा अभी भी बहुत कुछ ऐसा नहीं मिलता कि सुन कर दिल बाग बाग हो है ,भोजपुरी में आल्हा,कजरी,चैती,विवाह गीत,सोहर आदि तो खूब सुनने को मिल जाता है पर एक अच्छे अलबम के नाम पर हमारे पास ऐसा कुछ नही है जिस पर गर्व किया जाय,मशहूर गायिका शारदा सिन्हा की आवाज़ मुझे तो बहुत अच्छी लगती है अगर उनका गाया "पनिया के जहाज़ से पल्टनिया बने अईहा हो" अगर खोजने पर मिला तो आपको ज़रूर सुनवाउंगा, पिछले पोस्ट में फ़िल्म "गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबों" के मधुर गीतों से आपको रूबरू कराया था आज इसी फ़ेहरिस्त में "लागी नहीं छूटे रामा" के गीत लेकर आया हूँ, मऊ (उत्तर प्रदेश) के श्री जगलाल जी ने "गंगा मईया तोहे पियरी ....के गानों को सुनकर अपनी खुशी ज़ाहिर की थी,फ़ोन पर उनसे बहुत देर तक भोजपुरी गीतों को लेकर हमारी बात हुई उनका कहना था इन गानों को किसी छोटे शहर के म्यूज़िकल स्टोर में तलाशना दुरूह कार्य है और लगे हाथ "लागी नाहीं छूटे रामा" और "बिदेसिया" के गीतों को भी सुनने की इच्छा ज़ाहिर की थी तो आज इसी फ़ेहरिस्त में "लागी नहीं छूटे रामा" के कुछ गीत लेकर आया हूँ, मज़ा लीजिये. वैसे इस फ़िल्म के बारे में कुछ और जानना चाहें तो आवाज़ पर भी पढ़ सकते हैं.


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Saturday, 23 May, 2009

हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो


आज भोजपुरी फिल्म का स्तर वाकई बहुत गिर गया है पर जब भोजपुरी फिल्म की शुरुआत हुई थी तब ऐसी स्थिति नहीं थी जो आज है, साठ के दशक में भोजपुरी में बनी पहली फिल्म "

"गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो"
में कम से कम सामाजिक सरोकार तो दिखता था पर ये ज़रुर है कि कुछ अच्छी भोजपूरी फ़िल्म बनने की जो शुरुआत हुई थी जैसे "लागी नाही छूटे रामा" या "बिदेसिया" जैसी फ़िल्मों के बाद फ़िल्मों का स्तर निम्न स्तर का होता चला गया,उन पुरानी फ़िल्मों के गीतों को सुनना आज भी एक सुखद एहसास दे जाता है, आज भोजपूरी फिल्म का जो हाल है किसी से छुपा नहीं है, मनोज तिवारी जब फ़िल्म के हीरो नहीं बने थे तब का उनका गाया लोकगीत "असिये से कईके बी ए लईका हमार कम्पटीशन देता" पसन्द आया था ,पर आज भी इन पुरानों गीतों में अपनी की सी महक है जो भुलाए नहीं भूलती शुरुआती दौर ही मील का पत्थर सबित होगा ये किसी ने सोचा नहीं था,

आज वो गीत मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ," हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो.... ये गीत लता जी और उषा मंगेशकर की आवाज़ में है मधुर गीत शैलेन्द्र के लिखे हैं और संगीत चित्रगुप्त का है।

फ़िल्म है "गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो" ।

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Saturday, 9 May, 2009

नये ब्लॉगिये का स्वागत करें......

भाई, मेरे मित्र अखिलेश धर हैं, बहुत दिनों से सोचते सोचते आखिरकार उन्होंने अपना ब्लॉग BADFAITH के नाम से शुरु किया है,अभी उन्होंने अपनी लिखी एक कविता पोस्ट की है। उम्मीद है कि अपने ब्लॉग के माध्यम से वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपने दार्शनिक विचार ले जा पायेंगे,भाई हम तो स्वागत करे ही रहे हैं आप भी उनका उत्साह ज़रूर बढ़ाएं।