हिन्दोस्तान के प्रसिद्ध लोक गायक राम कैलाश यादव एक ऐसी शक्सियत हैं, जिनके बारे में बहुतों को पता नहीं है..पर उन्होने लोकगीतों के माध्यम से समाजिक कुरीतियों पर बहुत व्यंग भी किये है, पर आज मैं उनकी गायी प्रसिद्ध कजरी सुनाता हूँ,कौने रंग मूंगवा कवनवें रंग मोतिया ..... साथ साथ आपको वही लोक गीत करेबियन चटनी गायक राकेश यनकरण की आवाज़ में उसी कजरी को सुना, तब से यही सोच रहा हूँ कि ये गाना कब लिखा गया होगा...और आज भी कैरेबियन द्वीप समूह में पूरे ताम झाम के साथ गाया जा रहा है....तो पहले सुनिये राम कैलाश जी की आवाज़ में इस कजरी को...
और इसी कजरी, कौने रंग मुंगवा कवनें रंग मोतिया ...को चटनी के अंदाज़ में गा रहे हैं राकेश यनकरण.....
न शास्त्रीय टप्पा.. न बेमतलब का गोल-गप्पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्तो, है रंगमंच तैयार..
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आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को हिन्दी बारहखड़ी को समझना और याद रखना बहुत जरुरी है.|
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आज एक बहुत ही पुराना कोई गाना सुन रहा था वो गीत १९५० के आसपास का लिखा हुआ था ..जब भी...
4 comments:
दोनों संस्करण लाजवाब हैं विमल भाई! शानदार!
दोनों अच्छे हैं....
सुन लिये. सही है.
चटनी तो यहाँ बहुत सुनने मिल जाता है. गयाना के काफी लोग हैं मगर कजरी-वाह जी! बहुत खूब. आभार.
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