
फोटो गुगुल के सौजन्य से
कहीं मन की बेचैनी है जो खत्म होने का नाम नहीं लेती,बहुत दिनों से कुछ ठुमरी पर चढ़ाया ही नहीं था और ऐसा भी नहीं कि लोग ठुमरी पर कुछ ताज़ा सुनने के लिये बेकरार हों, इधर लाईफ़लॉगर की वजह से पुरानी पोस्ट जो लाईफ़ लॉगर के प्लेयर पर चढ़ाया था उसकी बत्ती लाईफ़लॉगर वालों ने गुल कर दी है ये बात अभी मुझे बहुत परेशान कर रहीं है,काफ़ी सारी मेहनत अब लाईफ़लॉगर की वजह से कुर्बान हो गई मुझे इसका मलाल तो हमेशा रहेगा।
चलिये इस रिमझिम भरे मौसम में कुछ हो जाय, पता है यहां मुम्बई में मौसम के बदलते देर नहीं लगती, कहते हैं मौसमी फल खाना शरीर के लिये लाभप्रद होता है,वैसे "मौसमी रचना भी अगर दिल से सुनी जाय तो मन में सकारात्मक विचार पैदा होता है" ये बात किसी ने कहा है या नहीं पर आज मैं कह दे रहा हूँ, तो अब बहुत ज़्यादा भांजने के बजाय मुद्दे पर आते हैं और पं. छ्न्नूलाल मिश्र जी की मखमली आवाज़ का लुत्फ़ लेते हुए एक कजरी सुनते है। यहां भी क्लिक करके पंडित छन्नूलाल जी की गायकी का लुत्फ़ लिया जा सकता है


