न शास्त्रीय टप्पा.. न बेमतलब का गोल-गप्पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्तो, है रंगमंच तैयार..
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आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को हिन्दी बारहखड़ी को समझना और याद रखना बहुत जरुरी है.|
पिछले दिनों नई उम्र के बच्चों के साथ Ambrosia theatre group की ऐक्टिंग की पाठशाला में ये समझ में आया कि आज की पीढ़ी के साथ भाषाई तौर प...
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आज एक बहुत ही पुराना कोई गाना सुन रहा था वो गीत १९५० के आसपास का लिखा हुआ था ..जब भी...
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अभी जुमा जुमा कुछ ही दिन हुए हैं, आई आई टी के एक कमरे में हमारी मुलाकात हुई थी, मैं बात कर रहा हूं,उस यादगार शाम की जब थॊड़े से चिट्ठाकारों ...
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क्या कवि सम्मेलनों का दौर ख़त्म होता जा रहा है, एक समय था जब छोटे छोटे शहरों में कवि सम्मेलनों और मुशायरों की वजह से शहर में चहल पहल खूब हु...
12 comments:
बहुत खूब
इसकी शक्ल किसी से मिलती है ..
aap to aise naa the..:)
विमल भाई कौन है ये,किसकी तस्वीर लगा दी? कमिश्नर साहब या उनका कुत्ता ? अरे!... ये कहीं अमुक खबरी की तस्वीर तो नही?
अरे अरे विमल भाई इसे तो हमने कल परसों मुंबई की सड़कों पर भटकते देखा था ।
बैठा हुवा है तनहा
आरजू-ऐ-दिल सजाकर!
मुमकिन है इसी रस्ते
कोई चैनल वाला गुजरे
छा गए सर.
ye aankhey ..kaisii sii to hain...
शानदार!
उफ ! मैं तो डर गयी थी जी !ऐसी शक्लें कभी कभी दिख नहीं जातीं आस पास ? क्या कल्पना है............
कुत्ते का इतना घोर अपमान!!!
इस बंदे से कहीं न कहीं जरुर मिला हूँ..क्या पता कहाँ..किसी मीट शीट में तो नहीं?? :)
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